![]() |
प्रतीकात्मक इमेज |
वर्षा ऋतू
वर्षा ऋतू आया है
बारीश ने गीत गाया है
नभ के आंगण मे देखो
काली काली छाया है
चल राजू चल पिंटू चल
भिगते है पानी मे चल
बोट बनाते कागज की
और रेती के बंगले चल
चल बारीश से बात करे
दिनभर सारी रात करे
इस झुलसाती गर्मी पर
पानी का आघात करे
इस वर्षा के आने से
धरती के भिग जाने से
जंगल बन जाते है हरे
पानी को आजमाने से
-मनोज बोबडे
कोणत्याही टिप्पण्या नाहीत:
टिप्पणी पोस्ट करा